स्टीफन हॉकिंस के बारे में कुछ ऐसी जानकारियां देंगे जो आप लोगों को भी इस महान शख्सियत का प्रशंसक बना देगी

हेलो दोस्तों आजके इस आर्टिकल में आपका एक बार फिर से स्वागत है आज का हमारा यह विशेष आर्टिकल एक ऐसे महान वैज्ञानिक के बारे में है जिन्हों ने साइंस के क्षेत्र में जो सफलताएं हासिल की है वह वाकई काबिले तारीफ है लेकिन हाल ही में हुई उनकी मृत्यु ने उनके चाहने वालों को सदमें में डाल दिया है आज के इस आर्टिकल में हम आपको स्टीफन हॉकिंस के बारे में कुछ ऐसी जानकारियां देंगे जो आप लोगों को भी इस महान शख्सियत का प्रशंसक बना देगी तो चलिए दोस्तों शुरू करते हैं ।

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स्वर्गीय स्टीफन हॉकिंस का जन्म जनवरी 1942 में इंग्लैंड के ऑक्सफ़र्ड नाम के शहर में हुआ था संयोग की बात यह है कि स्टीफन हॉकिंस का जन्म महान वैज्ञानिक गैलीलियो के जन्मदिन वाले दिन ही हुआ था और हॉकिंस भी उनके जितने ही प्रतिभावान थे बचपन से ही हॉकिन्स अपनी उम्र के बच्चों से काफी आगे थे उनकी बौद्धिक क्षमता अपनी उम्र के बच्चों से कहीं ज्यादा थी आप उनकी बुद्धिमता का अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि बचपन में ही उन्होंने इधर-उधर पड़े स्पेयर पार्ट से अपना खुद का कंप्यूटर बना लिया था उनकी प्रतिभा को देखकर उनके दोस्त और रिश्तेदार उन्हें आइंस्टाइन बुलाते थे और यह भी एक संयोग ही है कि जिस दिन उनकी मृत्यु हुई यानी 14 मार्च को अल्बर्ट आइंस्टाइन के जन्म की तारीख है

हॉकिंस को पता चला कि वह एक ऐसी बीमारी से ग्रस्त जिसका कोई इलाज नही है इस बीमारी का नाम ” न्यूरॉनमोटर डिजीज ” था यह एक ऐसी बीमारी थी जिसमें मांसपेशियों को नियंत्रित करने वाला तंत्र धीरे धीरे कमजोर पड़ जाता है और फिर नष्ट हो जाता है और धीरे-धीरे मरीज अपंग हो जाता है तब उस समय डॉक्टर का कहना था कि हॉकिन्स के पास अब ज्यादा वक्त नहीं है वह ज्यादा दिन तक नहीं जी पाएंगे लेकिन हॉकिन्सकी इच्छाशक्ति और कुछ कर गुजरने की चाहत ने उन्हें आजतक जिंदा रखा जिसे देखकर सारा जमाना अचंबित रह गया था

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धीरे धीरे हॉकिन्स का शरीर उनका साथ छोड़ रहा था और 21 साल की आयु में उनके शरीर का बाया हिस्सा पूरी तरह से पैरालाइज हो चुका था और उन्हें व्हील चेयर का सहारा लेना पड़ा लेकिन उनकी यह व्हीलचेयर भी उन्हीं की तरह बेहद इंटेलिजेंट थी यह व्हील चेयर खासतौर पर हॉकिन्स के लिए ही बनाई गई थी जो उनके मस्तिष्क , उनकी आंखों और हाथों के कंपन से पता लगा लेती थी कि हॉकिन्स क्या बोलना चाहते हैं हॉकिंन्स और उनकी व्हिलचेर के बारे में एक और बात ऐसी है जिसे जानकर आप लोग हैरान हो जाएंगे

हॉकिंन्स अपनी व्हिलचेर को काफी रफ तरीके से चलाते थे वह एकबार व्हिलचेर चलाते चलाते ब्रिटेन के प्रिंस के पैर पर चढ़ गए थे उनके इस चेर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस नामकी एक टेक्नोलॉजी का उपयोग किया गया जिसने हॉकिंन्स की जिंदगी को आसान कर दिया था जिसके बावजूद हॉकिंन्स आर्टिफिशियल इंटेलीजन्स से होने वाले नुकसान को लेकर चिंतित थे यू तो वह ब्रिटेन के रहने वाले थे लेकिन उन्हें जो कृत्रिम आवाज दी गई है वह अमेरिकन एक्सेंट में बात करती है और बहुत कम ही लोग जानते हैं कि उन्होंने अपनी इस कृत्रिम आवाज को पेटेन्ट करवा रखा था ।

उनका कहना था कि हमारी पृथ्वी अपने जीवन के आखिरी चरण पर पहुंच चुकी है और अगर हम इंसानों को बचना है तो जल्द ही उन्हें स्पेस में अपने रहने की और कोई दूसरी जगह ढूंढ लेनी चाहिए physics और science से जुड़ी कई किताबों मे हॉकिन्स का विशेष योगदान रहा है लेकिन बहुत ही कम लोग जानते हैं हॉकिन्स ने बच्चो की किताब ” george’s key to the universe ” भी लिखी है और एक कार्टून टीवी सीरीज simpsons में कई बार दिखाई दिए हैं इस कार्टून सीरीज के कई एपिसोड में हॉकिन्स को दिखाया गया है जिसके कारण अमेरिका के कई बच्चे उन्हें कार्टून कैरेक्टर समझते हैं जैसे मिकी माउस डॉनल्ड की तरह ।

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हॉकिन्स के अनुसार भगवान , भाग्य , दुर्भाग्य , स्वर्ग और नर्क जैसी कोई चीज नहीं होती उनके अनुसार हमारी उत्पत्ति ” बिग बैंग ” से हुई है और बिग बैंग से पहले इंसान का कोई अस्तित्व नहीं था उनका मानना था कि अगर इंसानों की उत्पत्ति के बारे में भगवान की अवधारणा को अगर हटा भी दिया जाए तो भी साइंस की मदद से इंसानों की उत्पत्ति को आसानी से समझाया जा सकता है और इस लिए हॉकिन्स की इस थियोरी की वजह से उन्हें खासी आलोचना का भी सामना करना पड़ा था स्टीफन हॉकिंस का यह भी मानना था कि एलियंस हो सकते हैं क्योकि हमारे अनंत ब्रह्मांड में अनेकों ग्रह और उपग्रह मौजूद है और उन पर जीवन भी हो सकता है ग्रह और उपग्रह पर रहता एलियन इंसानो जैसा दिखे वह जरूरी नहीं एलियन हम से 10 गुना बडे भी हो सकते हैं या फिर महज किसी माइक्रो ओर्गानिज़्म के जैसे भी हो सकते है

हॉकिन्स का यहां तक मानना था कि एलियन द्वारा किये गए जिस हमले की आशंका हम सालो से जता रहे हैं वह कई साल पहले घटित हुआ हो सकता है और एलियंस आज भी कीटाणुओ की शक्ल में पृथ्वी पर कहि मौजूद हो स्टीफन आज इस दुनियां में हमारे साथ नहीं है लेकिन उनका जीवन हमें यह सिखाता है कि इंसान शरीर से अपंग हो सकता है लेकिन दिमाग से नहीं और इसी दिमाग की इच्छाशक्ति की मदद से इंसान कुछ भी हासिल कर सकता है ।

स्टीफन हॉकिन्स को इस शताब्दीका सबसे महान वैज्ञानिक कहा जाता है स्टीफन हॉकिन्स को विज्ञान क्षेत्र में दिए गए इस अभूतपूर्व योगदान के बदले दो बार नोबल पारितोषिक से नवाजा गया था वह इस दुनिया के एक मात्र वैज्ञानिक थे जिनको जी ते जी 2 बार नोबल पारितोषिक दिया गया इसीलिए स्टीफन हॉकिन्स को अवकाश जगत का पिता माना जाता है उनके द्वारा कीये गए संशोधन सालो तक इंसानो को मार्गदर्शन देते रहेंगे ।

स्टीफन हॉकिंग्स के बारे में आपके क्या विचार है यह आप हमको नीचे कमेंट के जरिये बता सकते है अगर आपको इस आर्टिकल में से हॉकिन्स के बारे में कोई जानकारी मिली हो और यह आर्टिकल आपको पसंद आया हो तो आप इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर करना ना भूले ।