पाकिस्तान इतिहास का पहला हिंदू पायलट – राहुल देव

सिंध प्रांत का राहुल देव बना पाकिस्तान इतिहास का पहला हिंदू पायलट

पाकिस्तान के इतिहास में यह संभवत: पहला मामला ही होगा, जब किसी हिंदू युवा को वायुसेना में पायलट के रूप में चुना गया है। पाकिस्तान विभाजन के समय एक इस्लामिक राष्ट्र के रूप में आकार लेनेवाला भारत का ही अलग हिस्सा है, जहाँ एक हिंदू के लिए अब तक यह स्थान प्राप्त करना बहुत मुश्किल था। क्योंकि, भारत जैसी धर्मनिरपेक्ष व्यवस्था वहा नही है।

पाकिस्तानी मीडिया में प्रकाशित एक रिपोर्ट के माध्यम से यह जानकारी प्राप्त की जा रही है। सिंध प्रांत के राहुल देव युवा पाकिस्तान वायु सेना में जीडी (जनरल ड्यूटी) के लिए पायलट अधिकारी के रूप में शामिल हुए हैं। राहुल देव मूल पाकिस्तान के सिंध प्रांत में स्थित सबसे बड़े जिले थारपारकर के निवासी हैं। पाकिस्तान में हिंदू आबादी लगभग 2% (अल्पसंख्यक) ही है। जबकि पाकिस्तान में थारपाकर ऐसा इलाका है जहां हिंदू अभी भी बड़ी संख्या में रहते हैं। राहुल देव इस अविकसित क्षेत्र से पाकिस्तान वायु सेना तक पहुंचने वाले पहले व्यक्ति बने हैं।

इस समय पाकिस्तान में अखिल पाकिस्तान हिंदू पंचायत के सचिव रवि दवानी ने राहुल देव की पाकिस्तान वायु सेना में नियुक्ति पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक (पाकिस्तान में हिंदू अल्पसंख्यक हैं) समुदाय के कई सदस्य सिविल सेवा के साथ-साथ सेना के अन्य अंगों में अपनी सेवाएं दे रहे थे। आम तौर पर, देश के कई बड़े बड़े चिकित्सक हिंदू समुदाय से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि अगर सरकार अल्पसंख्यकों पर अधिक ध्यान देती है, तो देश की सेवा करने के लिए भविष्य में कई राहुल देव तैयार होंगे।

हालांकि, सरकार राहुल देव जैसे कई युवाओं पर ध्यान नहीं दे रही है। पाकिस्तान में भी, कई राहुल देव अपनी क्षमता प्रदर्शित कर सकते हैं अगर कौशल के आधार पर उन्हें अधिकार प्राप्त हो। लेकिन, पाकिस्तान में स्थिति इसके विपरीत है। पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की स्थिति दयनीय है। अधिकांश अल्पसंख्यक लगातार अपने अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं।

रिपोर्ट: पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों को कोई धार्मिक स्वतंत्रता नहीं है।

हाल ही में, पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग ने 2019 के लिए अपनी रिपोर्ट तैयार की है। इस रिपोर्ट के आधार पर, मानवाधिकारों पर पाकिस्तान का रिकॉर्ड कुछ अधिक ही चिंताजनक है, जिसमें बताया है की राजनीतिक विरोध के स्वर पर व्यवस्थित नियंत्रण के साथ-साथ मीडिया की आवाज़ को भी दबाया जा रहा है। आयोग ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा है कि कोरोना वायरस महामारी कमजोर वर्गों, विशेष रूप से धार्मिक अल्पसंख्यकों की स्थिति को और भी खराब करेगी। पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग (HRCP) द्वारा गुरुवार को जारी एक गए रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि धार्मिक अल्पसंख्यक अपनी धार्मिक स्वतंत्रता या मान्यता के लाभ पूरी तरह से उठाने में सक्षम नहीं हैं, जिसकी गारंटी उन्हें संविधान के द्वारा दी गई है।

2019 में, “मानव अधिकारों की स्थिति” शीर्षक से एक रिपोर्ट प्रकाशित की गई थी, जिसमें कहा गया था कि कई समुदायों में उनके पूजा स्थलों के आधार पर भेदभाव किया जाता है। महिलाओं को जबरन धर्मांतरण और रोजगार तक पहोचने में भी उनके साथ भेदभाव किया जाता है। पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग (HRCP) ने कहा कि व्यापक तौर पर सामाजिक और आर्थिक रूप से हाशिये पर डाले जाने के कारण समाज का सबसे कमजोर तबका अब न लोगों को दिखता है न उनकी आवाज सुनी जाती है।