एक चमत्कारी उपाय जिससे लक्ष्मी चार हाथ से धन की वर्षा करेंगी

एक चमत्कारी उपाय जिससे लक्ष्मी चार हाथ से धन की वर्षा करेंगी

जीवन में पैसे की कमी ऐसी सबसे बड़ी समस्या है, जिसमें फंसा व्यक्ति किसी भी तरह की दुष्टता कर सकता है। आजकल, अगर किसी व्यक्ति के पास जीवन जीने के लिए पर्याप्त धन नहीं है, तो वह ऐसा नहीं करने पर भी कई चीजें करके पैसा कमाने के लिए लालाहित होता है और वह जाने या अनजाने में पाप के रास्ते पर चलना शुरू कर देता है।

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गलत रास्ते अपनाने वाले लोगों को थोड़े समय के लिए लाभ जरुर मिलता है, लेकिन अंत में उसका परिणाम तो बुरा ही आता है। लेकिन हम यहां पर एक ऐसे उपाय के बारे में बात करने जा रहे हैं जो किसी भी जातक को पतन के रास्ते से वापस ला सकता था। जी हां, शिवरात्रि का त्योहार नजदीक आ रहा है तो आप भी इस उपाय का लाभ उठा सकते हैं।

भगवान भोलेनाथ को भोला माना जाता है क्योंकि महादेव भक्तों के दर्द को दूर करने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। जो लोग विश्वास के साथ उनकी पूजा करते हैं, वे भोलेनाथ से इसका फल भी अवश्य ही प्राप्त कर शकते हैं। तो इस साल की शिवरात्रि को न केवल उपवास और शिव की पूजा करने से ही नही बल्कि एक शुभ शुरुआत करके उत्सव मानाने के लिए लाए हैं।

लक्ष्मीजी को धन की देवी माना जाता है, ऐसा कहा जाता है कि जिस पर लक्ष्मीजी की कृपा होती है उसे कभी धन की कमी नहीं होती है। लेकिन कैसे …? लक्ष्मीजी की कृपा पाने के लिए हम क्या कर सकते हैं …? क्या कोई रास्ता है …? हाँ, दरिद्रदहन शिवस्तोत्रम का पाठ। इस शिवरात्रि की शुभ शुरुआत दरिद्रदहन शिवस्तोत्रम का पाठ है। इस पाठ को नियमित रूप से करने से लक्ष्मीजी घर में स्थायी रूप से निवास करती हैं और गरीबी हमेशा के लिए मिट जाती है। इसीलिए इस भजन को दरिद्रदहन स्तोत्र कहा जाता है। तो आप इस पाठ को किसी भी समय करना शुरू कर सकते हैं, लेकिन अगर महाशिवरात्रि का त्योहार जल्द ही आता है, तो उसी दिन से शुरू करें। यह शुभ शुरुआत करे शिव की कृपा से आपके जीवन में हमेशा खुशहाली और समृद्धि बनी रहे।

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दरिद्रदहन शिवस्तोत्रम

विश्वेश्वराय नरकार्णव तारणाय

कणामृताय शशिशेखरधारणाय।

कर्पूरकान्तिधवलाय जटाधराय

दारिद्र्य दुःखदहनाय नमः शिवाय॥१॥

गौरीप्रियाय रजनीशकलाधराय

कालान्तकाय भुजगाधिपकङ्कणाय।

गंगाधराय गजराजविमर्दनाय

दारिद्र्य दुःखदहनाय नमः शिवाय॥२॥

भक्तिप्रियाय भवरोगभयापहाय

उग्राय दुर्गभवसागरतारणाय।

ज्योतिर्मयाय गुणनामसुनृत्यकाय

दारिद्र्य दुःखदहनाय नमः शिवाय॥३॥

चर्मम्बराय शवभस्मविलेपनाय

भालेक्षणाय मणिकुण्डलमण्डिताय।

मंझीरपादयुगलाय जटाधराय

दारिद्र्य दुःखदहनाय नमः शिवाय॥४॥

पञ्चाननाय फणिराजविभूषणाय

हेमांशुकाय भुवनत्रयमण्डिताय।

आनन्दभूमिवरदाय तमोमयाय

दारिद्र्य दुःखदहनाय नमः शिवाय॥५॥

भानुप्रियाय भवसागरतारणाय

कालान्तकाय कमलासनपूजिताय।

नेत्रत्रयाय शुभलक्षण लक्षिताय

दारिद्र्य दुःखदहनाय नमः शिवाय॥६॥

रामप्रियाय रघुनाथवरप्रदाय

नागप्रियाय नरकार्णवतारणाय।

पुण्येषु पुण्यभरिताय सुरार्चिताय

दारिद्र्य दुःखदहनाय नमः शिवाय॥७॥

मुक्तेश्वराय फलदाय गणेश्वराय

गीतप्रियाय वृषभेश्वरवाहनाय।

मातङ्गचर्मवसनाय महेश्वराय

दारिद्र्य दुःखदहनाय नमः शिवाय॥८॥

वसिष्ठेन कृतं स्तोत्रं सर्वरोगनिवारणं।

सर्वसंपत्करं शीघ्रं पुत्रपौत्रादिवर्धनम्।

त्रिसंध्यं यः पठेन्नित्यं स हि स्वर्गमवाप्नुयात्॥९॥

॥ इति वसिष्ठ विरचितं दारिद्र्यदहनशिवस्तोत्रं सम्पूर्णम्॥

लेखन संकलन : अश्विनी ठक्कर