दो लोगों के बीच कम से कम छह फीट की दूरी बनाए रखना कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने का एकमात्र तरीका है।

सामाजिक दूरी अब एकमात्र बचाव: दो व्यक्ति के बीच 6 फीट की दूरी रखें: विशेषज्ञ

कोरोना महामारी के इस समय में, पूरी दुनिया लोगों के हित के लिए लड़ रही है। कोरोना वायरस की महामारी में यह चार महीने पूरी दुनिया के लिए सबसे खराब साबित हुए हैं। कई देश अब या तो लॉकडाउन में हैं या कुछ देशों में लोग अपने घरों में फंसे हुए हैं। इन सब के बावजूद महामारी के समाप्त होने की कोई निश्चित संभावना नहीं दिख रही है। कई देशों की स्थिति नियंत्रण से बाहर होती जा रही है। वायरस से लड़ने के लिए अभी तक किसी भी प्रकार की कोई दवाइ नहीं मिली है। फिलहाल, यह वैज्ञानिक और चिकित्सा विशेषज्ञों द्वारा सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया है कि सामाजिक दूरी यानी दो लोगों के बीच कम से कम छह फीट की दूरी बनाए रखना कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने का एकमात्र तरीका है।

विशेषज्ञों के अनुसार, कोरोनो वायरस से बचने की वैक्सीन कम से कम एक या दो साल से दूर नहीं है। अब तक इस्तेमाल किए गए सभी उपचार वैकल्पिक लाभ देने वाले सिद्ध हुए है। भीड़ में या एक साथ रहने से दुनिया भर में लाखों लोगों की जान जाने की पूरी संभावना है। कोरोना वायरस के निरंतर संक्रमण फैलने से रोकने के लिए अधिकतर सामाजिक दूरी का शारीरिक रूप से पालन करना आवश्यक हो गया है। संभावित खतरों से बचने के लिए कुछ सामाजिक संपर्कों को स्वीकृति दी जा सकती है।

यूरोपीय देशों में विश्वविद्यालयों द्वारा की गई खोज:

तीन यूरोपीय विश्वविद्यालयों के जनसंख्या और समाजशास्त्र के शोधकर्ताओं के अनुसार, लोगों के बड़े बड़े विस्तृत समूहों को छोटे छोटे समूहों में विभाजित किया जाना चाहिए। क्योंकि अधिकांश लोग एक ही समूह के लोगो के संपर्क में रहते है, उनका किसी अन्य समूह के साथ संपर्क कम होता है। यदि दो समूहों के बीच का संपर्क कम किया जाये, तो उस स्थिति में संक्रमित व्यक्ति द्वारा वायरस फैलने की संभावना भी अपनेआप ही कम हो जाती है।

जनसंख्या को छोटे समूहों में विभाजित करें:

विभिन्न दिशा-निर्देशों के बीच वैज्ञानिक और चिकित्सा क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने एक स्वर में मास्क लगाना, तापमान की जाँच और हाथों को बार-बार धोने के साथ-साथ सामाजिक दूरी का ध्यान रखने के लिए भी कहा गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि लोगो के बड़े समूहों को छोटे समूहों में विभाजित करना ही सार्स – कोविड-19 के संक्रमण को रोकने का सबसे अच्छा तरीका है।

कार्यस्थल और धर्मस्थल दोनों व्यवस्था बदलनी चाहिए:

विशेषज्ञों के अनुसार, कोरोना महामारी राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय अर्थव्यवस्थाओं पर भारी पड़ रही है। इससे गरीबी और बेरोजगारी भी बढ़ती जा रही है। अर्थव्यवस्थाओं को कार्यक्षम बनाने के लिए अब कार्यस्थल के नियम, शिफ्ट की टाइमिंग और बैठक या फिर कार्य की संरचनाओ को फिर से जांचने की आवश्यकता है। लोगों को शारीरिक तौर पर दूरी भी रखनी होगी, चाहे वे कार्यस्थल पर हों या धर्मस्थल पर या फिर किसी सार्वजानिक स्थान पर।

भारत जैसे अधिक आबादी वाले देश के लिए चुनौतीपूर्ण:

यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफोर्ड के लिवरहोम सेंटर फॉर डेमोग्राफिक साइंसेज और समाजशास्त्र विभाग के एक शोधकर्ता ने कहा की इस समय के दौरान हम खुद यह तय कर सकते हैं कि हमारे कौन से संपर्क लंबी दूरी के रिश्ते हैं, जिनसे बचा जाना चाहिए। हालांकि, भारत जैसे अधिक आबादी वाले देश के लिए ऐसी व्यवस्था एक चुनौतीपूर्ण कदम हो सकती है। जहां एक छोटी आबादी एक छोटे से क्षेत्र में रहती है और उनके कार्यस्थल भी अपेक्षा से बहुत छोटे होते है।

सामाजिक दूरी की रणनीति कई देशों ने अपनाई:

चीन के साथ दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और हांगकांग में सामाजिक दूरी की रणनीतियां प्रमुख है। यहां हजारों लोगों की जान बचाने में यह सहायक हुई है। इन देशों ने पिछले एक पखवाड़े में अधिकांश लॉकडाउन प्रतिबंध हटा दिए हैं। कुछ यूरोपीय देश जैसे फ्रांस, इटली और स्पेन भी इस महीने के अंत तक अधिक लोगों को घुमने फिरने की अनुमति देने की योजना बना रहे हैं।

शायद सामाजिक दूरी ही एकमात्र विकल्प बच जाता है जब तक आपके पास बीमारी का कोई निश्चित उपचार नहीं है, जो आपको कोरोना के खिलाफ मुश्किल समय में लंबे समय तक सामना करने की अनुमति देगा। क्योंकि केवल सामाजिक दूरी का अनुसरण करके हमें जीवन जीना होगा, जब तक कि इसके लिए एक निश्चित दवा नहीं बनाई जाती है।