लोकडाउन : दो गर्भवती महिला डोक्टर गर्भ में पल रहे बालक की चिंता न कर अदा कर रही हे अपना कर्तव्य

लोकडाउन : दो गर्भवती महिला डोक्टर गर्भ में पल रहे बालक की चिंता न कर अदा कर रही हे अपना कर्तव्य

कोरोना फाइटर्स

एक तरफ जहां पूरी दुनिया में नावेल कोरोना वायरस का डर फैला हुआ है, भारत में भी देखा जाये तो पिछले कुछ दिनों से निरंतर नावेल कोरोना वायरस के नए केस प्रतिदिन रजिस्टर हो रहे है। गुजरात राज्य में भी कोरोना के संक्रमण का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा हे, और कई लोग इस वायरस के कारन अपनी जान खो बैठे है। नावेल कोरोना वायरस का संक्रमण ज्यादा न फैले उसे ध्यान में रखकर केंद्र सरकार द्वारा पुरे देश में लोकडाउन लागू कर दिया गया है। वही दूसरी और अनगिनत राष्ट्र सेवक अपने जीवन की परवा न करते हुए होम कवोरन्टाइन किये गए लोगो की देखभाल करने में जुटे हुए है। आज हम आपको इसी प्रकार की कुछ महिलाओ के बारे में बतायेंगे जो की गर्भवती अवस्था में होते हुए भी वर्तमान स्थिति को ध्यान में रखते हुए सेवा कार्य कर रही है, साथ साथ सुरक्षा के कदम उठाकर अपना ध्यान भी रख रही है और पूरी निष्ठा के साथ देश के प्रति अपना कर्तव्य भी अदा कर रही है।

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– दो गर्भवती महिला डोक्टर जो पोरबंदर में अपना कर्तव्य पालन कर रही है

पोरबंदर जिल्ले के पंचायत आरोग्य विभाग में RBSK द्वारा कार्यरत पोरबंदर के डॉ। डिम्पल बहन पंड्या और डॉ। मनाली बहन भट्ट ये दोनों डॉक्टर्स वर्तमान समय में गर्भवती है। लकिन फिर भी यह दोनों डॉक्टर्स छुट्टिया लेने के बजाय होम कवोरन्टाइन किये हुए लोगो की सेवा और उनके रिपोर्ट्स सहित आवश्यक अहवाल, वहिवटी कामकाज और सेवाकीय कर्तव्य पालन में लगी हुई है। डॉ। डिम्पल पंड्या बताती है की, हम इन परिस्थितियो में भी अपना काम कर रहे है। जिस से लोगो को भी यह समझते हुए स्वयं शिस्त का पालन करना चाहिए और कोरोना के कारन जो लोकडाउन की परिस्ठितियो का निर्माण हुआ है उन परिस्थितियो को गंभीरतापूर्वक समझते हुए अपने अपने घर में सुरक्षित रहेना चाहिए।

– डॉ। डिम्पल बहन पंड्या और डॉ। मनाली बहन भट्ट प्रेरणादायक कार्य कर रहे है। :

पोरबंदर जिल्ला पंचायत आरोग्य अधिकारी ऐ। जी। राठोर ने डॉ। डिम्पल बहन पंड्या और डॉ। मोनाली बहन भट्ट के बारे में बताते हुए कहा की, पुरे पोरबंदर जिल्ले में डॉक्टर्स और कर्मचारियो के टीम वर्क द्वारा इस समय एक दुसरे को सहयोग देते हुए सुरक्षा कार्य किया जा रहा है। डॉ। डिम्पल बहन पंड्या और डॉ। मनाली बहन भट्ट प्रेरणारूप कार्य कर रहे हे इसलिए उन्हें प्रोत्साहित भी किया गया है। पोरबंदर जिल्ले के आरोग्य विभाग का सटाफ खड़े पैर अपने जिल्ले में ज्यादा से ज्यादा लोगो को नावेल कोरोना वायरस से सचेत कर रहे है और सरकार द्वारा दि गई मार्गदर्शिका के अनुसार सुरक्षा के कदम उठा कर अपने द्वारा संभव हर प्रयास पुरे समर्पण भाव से वहन कर रहे है।

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उपरोक्त आरोग्य विभाग में जैसे दो महिना डॉक्टर्स अपनी गर्भवती अवस्था में भी सेवा कर रही है, उसी तरह से राजकोट की एक महिला पोलिस ऑफिसर भी अपने ६ महीने की प्रेगनेंसी के बावझुद एक जिम्मेदार पुलिस की तरह अपने कर्तव्य को अदा कर रही है। जिसके बारे में आगे हम आपको बताने वाले है।

राजकोट शहर के महिला पोलिस स्टेशन में ऐएसआई के पद पर कार्य कर रही नसरीन बेसिम, जो की वर्तमान समय में ६ महीने की प्रेग्नन्सी अवस्था में है। लेकिन फिर भी वह अपनी एक पुलिस अधिकारी के कर्तव्य को पूरी निष्ठा से अदा कर रही है। नोवल कोरोना वायरस जैसी महामारी भी नसरीन बहन बेसिम को अपने कर्तव्य पथ से नहीं जुका शकी। उल्टा नसरीन अपने बच्चे को गर्भ संस्कार स्वरूप अपने बच्चे को देश के प्रति जवाबदेही शिखा रही है। शिखा रही है की परिस्थितिया चाहे कैसी भी मुश्किल क्यों न हो, देश के प्रति निष्ठा और हमारी जिम्मेदारी से हमें कभी चूकना नहीं चाहिए।

गर्भवती अवस्था के दौरान सामान्यत महिलाओ की रोगप्रतिकारक शक्ति कम हो जाती है। गर्भवती अवस्था में शिशु का पालन और पोषण सही तरीके से हो पाए उसके लिए समय पर भोजन, पानी और दवाइओ का सेवन आवश्यक होता है, और आराम की भी अधिक आवश्यकता रहेती है। नसरीन बहन बेसिम ने इन सब चीजो को ध्यान में रखते हुए भी ६ महीने की प्रेग्नन्सी होने के बवझुद वह नियमित रूप से अपने कर्तव्य के पालन के लिए जिम्मेदारी पूर्वक समय पर पहोच जाती है। एक भारतीय नारी जब निश्चित कर लेती है की लड़ना ही है तो जंग के मैदान में आने के बाद उसे कोई नहीं रोक शकता। नसरीन बेसिम जैसी महिलाये अपनी जवाबदेही और कर्तव्यों को निभाने के लिए किस हद तक जा शकती है वह हम नसरीन बहन बेसिम की बातो से ही समझ शकते है।

नसरीन बहन से जब टेलीफोनिक संवाद किया गया तो उन्होंने हमें बताया की “पहले तो मेरे परिवार को थोडा डर लगा था की मेरा न सही लेकिन आनेवाले बच्चे का सोचकर ही एक सप्ताह की छुट्टिया रख लू। लेकिन जैसे जैसे दिन बीतने लगे परिस्थितिया ज्यादा गंभीर होती जा रही थी। उस समय पी।आई। सर भी अधिक मददरूप हुए और उन्होंने कहा की आप ड्यूटी ज्वाइन कर ले आपका ध्यान रखने का प्रयास किया जायेगा। फिर मैंने भी सोचा की में अपने कर्तव्यो से दूर नहीं रह पाऊँगी और यह मेरी जिम्मेदारी है जिसे निभाना मेरा कर्तव्य है।”

नसरीन और दोनों डॉक्टर्स जनता को यह अपील कर रहे है की “अगर परिवार का महत्व समझना है तो इन गंभीर हालातो में काम कर रहे डॉक्टर्स, सफाई कर्मचारी और पुलिस जवानो को पूरा सहयोग करे। यह मान लें की, आप सब को २१ दिन आपने परिवार के साथ बिताने के लिए ही मिलें है। इसलिए नोवल कोरोना वायरस की गंभीरता को समझकर घर में रहे और इस संकट को टालना भी एक युध्ध ही समजे।”