२१ साल की लड़की कमा रही है ३५ लाख रुपए हर साल

२१ साल की लड़की कमा रही है ३५ लाख रुपए हर साल

राजस्थान के सीकर जिल्ला के राधा किशन गांव में तकरीबन २१ लड़की का जन्म हुआ, जिसने अपने मातापिता का नाम रोशन किया है | २१ साल की उम्र में दिव्या सैनी अभी हाल ही में हर साल ३५ लाख रुपए कमा रही है | दिव्या सैनी हैदराबाद में एमेझोन कंपनी में नौकरी कर रही है |

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प्रतिभा हो तो दिव्या जैसी , सीकर से लेकर हैदराबाद तक का दिव्या का सफर बहोत रोमांचक और प्रेरणादायी रहा है | ६ साल की उम्र तक दिव्या सैनी स्कुल नहीं गई थी और १० साल की उम्र में १०वी कक्षा और १२ साल की उम्र में सायंस बायोलॉजी से १२वी की कक्षा पास कर ली थी | दिव्या सैनी की कम उम्र की वजह से प्री-मेडिकल टेस्ट नहीं दे पाई तो दिव्या ने डॉक्टर के बदले इंजीनियर बनना तय किया और एडिशनल सब्जेक्ट के तौर पर गणित के विषय में १०० में से १०० अंक लाकर १२वी की कक्षा पास कर ली |

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सीकर जिल्ला का गांव राधाकिशन पूरा गांव के शिक्षक सांवरमल सैनी और शिक्षिका किरण सैनी का बेटा निलोत्तल सैनी के जन्म डेढ़ साल बाद १५ जुलाई, १९९८ के रोज उनके घर बेटी दिव्या का जन्म हुआ था | निलोत्तल तीसरी कक्षा में पढ़ रहे थे, तभी ही दिव्या ने भी स्कुल जाने की शुरुआत की, लेकिन दिव्या की जिद्द थी की वे पहेली कक्षा के बजाय अपने भाई निलोत्तल के साथ तीसरी कक्षा में बैठेंगी। शुरू में तो दिव्या उनके भाई निलोत्तल के साथ तीसरी कक्षा में पढ़ रही थी, लेकिन बाद में स्कुल के संचालन ने दिव्या को एलकेजी में बिठाना चाह रहे थे इसलिए दिव्या ने स्कुल जाना बंध कर दिया।

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दिव्या के पिता सांवरमल सैनी बताते थे की उनका बेटा निलोत्तल तीसरी से पांचवी कक्षा तक पढ़ाई की तब तक दिव्या स्कुल तो नहीं गई, लेकिन घर पर बड़े भाई निलोत्तल के साथ पढ़ाई की जिद्द करती थी. ऐसे में में दिव्या को भी भाई के साथ साथ हर साल पुस्तके लाकर दिया जाने लगा था| हम सबको आश्चर्य हुआ की दिव्या के स्कुल ना जाने के बावजूद पढ़ाई में बहोत अच्छी थी. जब बड़े भाई निलोत्तल ने छठ्ठी कक्षा में था तब तय गया था की दिव्या की परीक्षा लेनी चाहिए क्योकि इससे दिव्या की शैक्षणिक लायकात को परख शके | परीक्षा में दिव्या अभ्यास के मामले में अपने बड़े भाई निलोत्तल के समान साबित हुई | इसलिए दिव्या पांचवी कक्षा के सवालों के जवाब भी बड़ी आसानी से दे पा रही थी| इसलिए दिव्या को उसके भाई के साथ छठ्ठी कक्षा में स्कुल में दाखिल किया गया था | तब दिव्या की उम्र महज ६ साल थी |

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छठ्ठी कक्षा से लेकर नौवीं कक्षा तक दिव्या ने अभ्यास पर अच्छी पकड़ जमा ली थी और राजस्थान माध्यमिक शिक्षण बोर्ड की १०वी कक्षा की परीक्षा में कमाल का प्रदर्शन किया था | लगातार प्रथम श्रेणी से पास होने वाली दिव्या ने दसवीं की परीक्षा में भी ७७.३ प्रतिशत के साथ पास की थी | दो साल बाद सायन्स बायोलॉजी के साथ १२वी की परीक्षा दी तो उसमे दिव्या ने ८३.०७ प्रतिशत हासिल किये | छोटी उम्र की वजह से दिव्या प्री-मेडिकल टेस्ट दे नहीं पायी, तो एडिशनल विषय गणित के साथ १०० प्रतिशत मार्क्स लाकर १२वी कक्षा पास की थी | इसके बाद दिव्या ने अपने भाई निरोत्तल के साथ जेइइ में नसीब आजमाया। और दोनों भाई-बहन पटना एनआईटी में प्रवेश मिला | डॉक्टर बनने का सपना देखने वाली दिव्या ने इंजीनियर बनने का रास्ता पकड़ लिया |

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साल २०१७ में पटना एनआईटी के दौरान, दिव्या को २९ लाख के सालाना पैकेज पर एमेझोन कंपनी में बतौर सॉफ्टवेर इंजीनियर-१ पद पर प्लेसमेंट मिला | दिव्या पटना से हैदराबाद चली गई | हाल में वही ही कार्यरत है | १५ जुलाई, २०१९ के दिन दिव्या ने अपना २१वा जन्मदिन मनाया | इस दौरान दिव्या को कंपनी में प्रमोशन मिला और २९ लाख का पैकेज बढ़कर ३५ लाख तक पहोंच गया |